हमारा उद्देश्य शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और संभावी ऋषिवादी भारत का निर्माण करना है। “संभाव से राष्ट्र सेवा ही ऋषिवाद का दर्शन है।” - एड़वोकेट नरेश कुमार कश्यप संस्थापक ऋषिवादी विचारधारा

ऋषिवादी कश्यप पार्टी

ऋषिवादी आरती — महर्षि कश्यप जी की

आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की, अदिति पति मरीचि नंदन की ॥ जाके तप से सृष्टि बन जावे, लोभ-दोष मन निकट न आवे । ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की ॥ सत्य कर्म संग सत्ययुग लाए, सत्य घटे तो त्रेता कहलाए । एक कोने में पाप जो पाए, पाप देख सत्ययुग घबराए ॥ श्री राम को आप ही लाए, ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की ॥ पाप कर्म जब रुक नहीं पाए, दो कोनों में पाप जो पाए । यही कल द्वापर कहलाए, श्री श्याम को आप ही लाए ॥ ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की ॥ अब है घोर पाप का कलियुग, सत्य को ढूंढूं अब मैं निसदिन । सत्य नहीं अब आगे आता, एक कोने में खुद को पाता । कौन सुने मनुहार हमारी, जय जय जय ऋषिवाद तुम्हारी ॥ किसे पुकारें राम कहें अब, किसे पुकारें श्याम कहें अब । अब तुम ही हो एक सहारे, ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की ॥ महर्षि कश्यप जी की आरती जो जन गावे, मुनि प्रेम सहित गावे । कहत ब्रह्मज्ञानी, वही ऋषिवादी बन कर, सबकी नैया पार लगावे ॥ ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की ॥

✍️ रचनाकार — अधिवक्ता नरेश कुमार कश्यप
(संस्थापक, ऋषिवादी विचारधारा)

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